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भक्त पुराण

भक्त पुराण


हिंदुस्तान में तीन प्रकार के भक्त बकसरत पाये जाते हैं, अगर हम इनका अवलोकन करें तो इन्हें तीन निम्नलिखित श्रेणियों में बाँट सकते हैं...
इनमे पहली श्रेणी में धार्मिक भक्त आते हैंहिंदुस्तान, आँख बंद करके धर्म के पीछे भागने वाले देशों में से एक है और यहाँ यूँ तो कई धर्म के लोग रहते हैं पर मुख्य रूप से हिन्दू और मुसलमान भक्त अपनी संख्या बल पर बाकी सभी को नगण्य किये हैं। कई मंदिरों-मस्जिदों, मज़ारों, धार्मिक यात्राओं, जुलूसों आदि में ये भीड़ के रूप में मिलते हैं, बाकी सामान्य जनजीवन में ये आपको हर तरफ मिल जायेंगे। माथे पर तिलक टोपी, गले में धार्मिक लॉकेट, ताबीज़, बाहों पर बाजूबंद, गंडे, कलाई पर कलेवा, काले धागे इत्यादि इनकी पहचान होती है। यह अपनी ही दुनिया में मगन रहते हैं, इनकी एक ही कमी है कि यह खुद को श्रेष्ठ और दूसरे सभी धर्मों को तुच्छ समझते हैं।
दूसरे नंबर पर तैंतीस करोड़ एक्वें देवता भगवान नरेंद्र मोदी के फॉलोवर्स आते हैं, जिन्हे सामान्य भाषा में मोदी भक्त, या संक्षिप्त रूप से भक्त कहा जाता है। 2014 में एकाएक यह भक्ति का संक्रमण इतनी तेज़ी से फैला था कि संख्या करोड़ों में जा पहुंची थी, जो अब धीरे धीरे तेज़ी से कम हो रही है। यह वे अंधविश्वास के मारे लोग हैं जो सिर्फ भक्ति के आधार पर मोदी की हर गलती, हर गलत फैसले को सिर्फ आत्मसात कर लेते हैं, बल्कि बेहद आक्रामक रूप से उसे डिफेंड करते हैं। इनकी मुख्य पहचान यह होती है कि इनसे आप सिंपल से तार्किक सवाल पूछें कि काला धन  लाने का वादा कियाडेढ़ साल में कई गुना ज्यादा बाहर चला गया... क्यों? महंगाई कम करने का वादा कियादाल सब्ज़ियों के भाव आसमान छू गए.. क्यों? भ्रष्टाचार मिटाने का वादा कियाखुद की कई राज्य सरकारों पर कई घोटालों के आरोप लग गए... कैसे? देश की तरक़्क़ी की बात की, पर डेढ़ साल में इतने साम्प्रदायिक दंगे हो गए कि समाज ही टूट गया... ये कैसे अच्छे दिन? तो रियल भक्त आपको कुछ यूँ जवाब देगा... तू कांग्रेस का पिट्ठू है... ढोंगी सेकुलर है... तू मुल्ला है, या मुल्लों का एजेंट है साले... तुझे पाकिस्तान फंड देता हैं मोदी जी बदनाम करने के लिए... तू एंटी-नेशनलिस्ट है... तू टेररिस्ट है... तेरी माँ कीतेरी बहन की .... भक्तों के संस्कार निराले :P
तीसरे नंबर पर वो आते हैं जो अभी तो थोड़े हैं पर जिस हिसाब से लोग संक्रमित हो रहे हैं, इनकी तादाद बढ़ते देर नहीं लगेगी। मुसलामानों के राजनीतिक सामाजिक मार्किट में नए नए उद्धारक आये हैंओवैसी बंधू (जिन्हे अभी रहमतुल्ला अलैय, या रज़ि अल्लाह ताला अन्हु कहना भर बाकी है भक्तों के लिए)... वे मुसलामानों से पूछते हैं कि साठ साल में कांग्रेस ने आपके लिए क्या कियाजैसे अगले ही आम चुनाव में वो सरकार बन जायेंगे और मुसलमानों को चाँद पर बिठा कर रख देंगे। भाई, साठ नहीं सिर्फ पच्चीस-तीस साल ही पीछे ही चले जाओ और देखो देश में कितनी गरीबी थी... खुद नहीं पता तो बाप दादा से पूछो... जयादातर कच्चे घर होते थे, लोग पदयात्राएं ज्यादा करते थे, किसी किसी के पास साइकिल होती थी और शान की सवारी राजदूत या बुलेट तो बस किसी किसी अमीर के पास ही होती थी... मोहल्ले में किसी किसी के घर शटर वाला ब्लैक एंड व्हाइट टीवी होती थी, जहाँ पूरे मोहल्ले के लोग महाभारत, रामायण, टीपू सुलतान देखते थे, फ्रिज का अत पता नहीं था, पूरे गावं या पूरे मोहल्ले में एक टेलीफोन होता था और कार एसी  तो उस ज़माने के अम्बानियों अडानियों के पास होती थी... फिर ज़रा आज के दौर में वापस लौट के आओ और आसपास नज़र डालो... कलर टीवी, कंप्यूटर, कूलर, ऐसी, फ्रिज, जैसे सामानो से लैस पक्के मकान, हर तरफ दिखेंगे... हर घर में दोपहिया, चार पहिया वाहन और हर हाथ में फोन... और कितनी तरक़्क़ी चाहिए? जितना विकास बाकी देश का हुआ उतना ही आपका भीफिर अलग से क्यों शिकायत? क्या चाहते थे आपकांग्रेस वाले आपके घर आके आपके मुंह में खाना डालते? आज आप सरकारी नौकरियों में नहीं तो इसके ज़िम्मेदार आप खुद हैं। आपको भी तो आरक्षण मिला हुआ है ओबीसी कोटे में... अगर आरक्षण के सहारे दलित पिछड़े सरकारी नौकरियों में अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं तो आप क्यों नहीं? क्या चाहते थेकांग्रेस बिना पढ़े लिखे आपको देश के 80 प्रतिशत हिन्दुओं की अनदेखी करके सरकारी नौकरियों से नवाज़ देती?
अभी ओवैसी भक्त मोदी भक्तों की तरह मर्यादा रहित आक्रामक नहीं हुए हैं, पर उम्मीद है बदलती फ़िज़ा में वह भी वही रुख अख्तियार करेंगे और आपके उपरोक्त सवालों के पूछने पर वो भी आपको RSS का एजेंट, सुवर, मुशरिक, काफ़िर और क़ौम का गद्दार घोषित करने से पीछे नहीं हटेंगे।.      

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