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नक़ाब

नक़ाब





नक़ाब या बुर्क़े के बहुत से किस्से अलग अलग मौकों पर सुनने में आते हैं—अक्सर यह सकारात्मक या नकारात्मक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता है। कहीं पश्चिमी देशों के स्कूल कॉलेजों में कार्यालयों में इसे पहनने की पाबन्दी पर चर्चा होती है तो कहीं इसे पहनने की छूट मिलने पर, कहीं आधुनिकाएँ इसे त्याग कर खुद ही इसकी होली जलती हैं तो चौक नक्खास में फिरती बुर्कापोश महज़बीनों के लिए बंद गोभियों के सम्बोधन भी सुनने को मिलते हैं। एक मुस्लिम होने के नाते मैंने प्रायः अपने घर, अपने आसपास की महिलाओं को इसे इस्तेमाल करते देखा है... अगर इसकी हिस्ट्री पे नज़र डाली जाये तो—
ये छठी शताब्दी में इस्लाम के साथ ही वजूद में आया था, यह एक किस्म का लबादा है जो चेहरे से लेकर पूरे शरीर को ढक लेता है, यह मुस्लिम महिलाओं को घर से बाहर गैर लोगों के बीच जाने पर खुद को कवर करने के काम आता है, जिसे मध्य एशिया में नक़ाब, बुरका, हिजाब, चदरी या परान्जा कहा जाता है... ये काले के साथ और भी रंगों में हो सकता है। इसका ज़िक्र क़ुरआन में भी पाया जाता है........


मुहम्मद, अपनी बीवियों, बेटियों और वफादार औरतों को कहो के वे खुद को एक बाहरी वस्त्र से चारों ओर से ढक लें, यह उनके लिए बेहतर है और वे मान्यप्राप्त होंगी और परेशान नहीं की जाएँगी, अल्लाह रहम दिल है और हमेशा माफ़ करने वाला है।
— Qur'an, Surah 33 (Al-Ahzab), Verse 59
और अपनी वफादार औरतों से कहो कि यह उनके निजी अंगों की रक्षा के लिए है, अपना सौंदर्य प्रदर्शित करने के लिए नहीं। उन्हें खुद को पूरी तरह ढक कर रखना है, उनकी सुंदरता को देखने का हक़--उनके पति, पिता, पति के पिता, उनके बच्चों, पति के बच्चों, भाइयों, भाइयों के बेटों, बहन के बेटों, दासों, पति के उन साथियों/समर्थकों, जो कामेच्छा रखते हों, के सिवा और किसी को नहीं..
— Qur'an, Surah 24 (An-Nur), Verse 31
इस सिलसिले में एक हदीस भी है... सही बुखारी के अनुसार, ईशा के समय हज़रत अबू बकर (रज़ि0), हज़रत अली (रज़ि0), हज़रत आयशा (रज़ि0) और कुछ अन्य  उच्च आस्था के लोग एक-दूसरे के साथ साथ चल रहे थे जब  हज़रत मुहम्मद (S.A.W.) मस्जिद से बाहर रहे  थे और उन्होंने इस दृश्य को देखा और एक महिला को आदेश दिया, दीवार की तरफ (किनारे) चलें और जब बाहर जाने के लिए निकलें तो अबाया (बुर्का) पहने।
इस बात का उनके जाते ही फ़ौरन अनुसरण किया गया और बस्ती की सारी औरतों को बताया गया, और उन औरतों ने सारी रात अबाया की सिलाई की और अगली सुबह जब फजर की नमाज़ हुई तो कोई औरत बिना अबाया के बाहर आई।



हालाँकि इसे हिजाब के रूप में खुद को ढकने छुपाने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन भारत में ये कई अन्य तरह से भी प्रयोग में लाया जाता है। आइये इसके उपयोग और दुरूपयोग पर नज़र डालते हैं....
0. सामान्यतया मुस्लिम महिलाएं हिजाब के तौर पर इसे पहनती हैं।
1. अक्सर  प्रेमिकाएं (मुस्लिम/गैर मुस्लिम) अपने प्रेमियों से मिलने जाने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं। 
2. अभिनेत्रियां (मुस्लिम/गैर मुस्लिम) अपनी पहचान छुपा के सिनेमा हाल में फिल्म देखने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं।
3. ख्वाज़ा मोइनुद्दीन चिश्ती की मज़ार पर मन्नतें मांगने जाने वाली मशहूर महिला हस्तियां (मुस्लिम/गैर मुस्लिम) भी इसका इस्तेमाल करती हैं।
4. बहुधा लड़के भी प्रेमिका के घर या किसी तकरीब में घुसपैठ करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
5. वेश्यावृत्ति पर मजबूर कई महिलाएं (मुस्लिम/गैर मुस्लिम) अपनी पहचान छुपाने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं।
6. कॉलेजों में पढ़ने वाली कई ऐसे अच्छे घरों की लडकिया (मुस्लिम/गैर मुस्लिम) जो अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए कभी कभार खुद को बेचने से पीछे नहीं हटतीं—वे कॉलेज टाईम में कस्टमर के घर या होटल में जाने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं।
7. एक राजनीतिक पार्टी के लोग अपनी रैलयों में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी दिखने के लिए अपनी ही हिन्दू स्त्रियों को इसे पहना कर टीवी पर हो हल्ला मचाते हैं कि मुस्लिम महिलाएं उनके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की फैन हैं।
8. धार्मिक सद्भावना के प्रचार प्रसार के लिए कुछ दक्षिणपंथी संगठन अपनी हिन्दू महिला सदस्य को नक़ाब पहना कर गणपति की भक्त बना कर पेश कर देते हैं (जैसा हाल ही में गणपति उत्सव के दौरान एक केस सामने आया)
9. हिन्दू स्त्रियों को नक़ाबें पहना कर कावंड यात्रा करने भी भेजा जा सकता है ताकि मुस्लिम महिलाओं में हिंदुत्व का क्रेज़ प्रदर्शित किया जा सके (नज़ारा सावन के दौरान देखने में आया), बिना यह जाने कि यह शिर्क है और शिर्क करके मुस्लिम महिला इस्लाम से ही बाहर हो जाएगी।
10. नफरत फैलाने वाले संगठन इसका इस्तेमाल पुरुष होते हुए भी बुर्का पहन कर मंदिर में गाय का मांस फेकने के लिए भी कर सकते हैं (यह मामला भी बकराईद  के दौरान देखने में आया)
तो उपयोग बहुतेरे हैं, दुरूपयोग भी—फिर भी नक़ाब के नाम पर आप नाक भौं सिकोड़ते हैं तो फिर यह आपके दोहरे मापदंड है।

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