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पैगम्बर और वेद पुराण


नदवा कॉलेज और बनारस हिन्दू यूनिवर्सटी से जुड़े कुछ मुस्लिम और हिन्दू विद्वानों ने दुनिया भर के प्राचीन ग्रंथों में इस्लामी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (स अ व) से जुडी बातें तलाशने की कोशिश की थी, ये शोध हालाँकि, ईसाईयों, यहूदियों, पारसियों, बौद्धों और हिन्दुओं की धार्मिक किताबों पर भी किया गया था, लेकिन यहाँ काबिले ज़िक्र हिन्दू धर्म से जुड़े ग्रंथों में हज़रत मुहम्मद (स अ व) से जुडी बातें तलाशने की कोशिश ही है...

सबसे पहले उन्होंने वेदों का सहारा लिया है जिसमे उन्होंने एक शब्द नराशंस पर खास ध्यान दिया है जिसका इस्तेमाल वेदों में कई जगह हुआ है...

विद्याधरोƧप्सरोयक्षरक्षोगन्धर्व किन्नर: । 
पिशचो गुहाक: सिद्धो भूतोƧमौ देवयोनय: ।। 
(
अमरकोश स्वर्गन्वर्ग 11वां श्लोक)

ऊपर के श्लोक में देवताओं की निम्नलिखित दस जातियों का, विद्याधर, अप्सरस, यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, किन्नर, पिशाच, गुह्यक, सिद्ध, भूत के रूप में उल्लेख किया गया है, जिनमें किसी भी जाति के लिए नराशंस शब्द प्रयोग नहीं होता जिसका मतलब यही होता है कि यह शब्द किसी मनुष्य के लिए प्रयोग हुआ है। अब कुछ जगहों पे नराशंस शब्द के इस्तेमाल वाले श्लोकों से पैगम्बर की समानताएं प्रकारांतर से जोड़ने की कोशिश की गयी है... जिनमे से मुख्य निम्नलिखित हैं ....

1.नराशंसमिह प्रियमस्मिन्यज्ञ उप हृवे ...........(ऋग्वेद संहिता 1: 13: 3) 
(
नराशंस की प्रशंसा की जायेगी तथा वह सबको प्रिय होगा।) 
2.
उष्ट्रा यस्य प्रवाहजो .......... (अथर्ववेद 20: 127: 2)
(
नराशंस सवारी के रूप में ऊंटों का प्रयोग करेगा।) 
3. ............
मधुजिहंव हविष्कृतम।।( ऋग्वेद 1: 3: 2) 
(
नराशंस को परोक्ष ज्ञान दिया जायेगा।) 
4.
नराशंस प्रति धामान्यजन तिस्प्रो दिव: प्रतिमहा स्वर्चि:। (ऋग्वेद 2: 3: 2) 
(
नराशंस अत्यधिक सुंदर एवं ज्ञान के प्रसारक होंगे।) 
5.
नराशंस वाजिनं वाजयत्रिह क्षयद्वीरं पूषणंसुम्नैरीमहे।(ऋग्वेद 1: 106: 4) 
(
नराशंस लोगों को पाप से निकालेगा।)
6.
एष इषाय मामहे.........। (अथर्ववेद 20: 127: 3) 
(
नराशंस का एक सांसारिक नाम मामह होगा.........।)
7. .........
शतं निष्कान....... (अथर्ववेद 20: 127: 3) 
(
नराशंस को सौ निष्क प्रदान किये जायेंगे.....।) 
8.
एष इषाय मामहे शतं निष्कान् दश स्रज:। (अथर्ववेद 20: 127: 3) 
(
नराशंस दस मालाओं वाला होगा।) 
9.
वीणि शतान्यर्वता सहस्रा दश गोनामम।। (अथर्ववेद 20: 127: 3) 
(
नराशंस दस हजार गौओं से युक्त होगा।)

इसी तरह महाभारत, श्रीमद भागवत महा पुराण, गरुड़ पुराण, भविष्यपुराण आदि में कल्कि अवतार के विषय में भी जो भविष्यवाणियां की गयी हैं उन्हें भी किसी न किसी तरह पैगम्बर के साथ जोड़ कर देखने की कोशिश की गयी है, इसके पीछे एक मज़बूत तर्क ये भी दिया गया है की जिस नराशंस या कल्कि के विषय में भविष्यवाणियां की गयी हैं, वो ऊँट, घोड़े की सवारी करने वाला होगा, तीर तलवार से लड़ने वाला होगा, जो कि इस मोटर कार, मॉउज़र, राइफल के ज़माने में संभव नहीं... यानी जिसका ज़िक्र है वो अतीत में कहीं आ चुका है और अतीत में जब ऐसे किसी शख्स की तलाश की जाती है जिस पर ये निशानियाँ खरी उतर सकें तो वो पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (स अ व) ही को इकलौती ऐसी शसखसियत मानते हैं...

हालांकि वेदों में अहमद और मुहम्मद से मिलते जुलते शब्द प्रयोग किये गये हैं, उदाहरणार्थ:
वेदाहमेत पुरुष महान्तमादित्तयवर्ण तमस: प्रस्ताव........ यनाय।। 
(
यजुर्वेद 31: 18) 

(
वेद अहमद (वेदाहमेत) महानतम पुरुष हैं, सूर्य के समान अंधेरे को परास्त करने वाले हैं, उन्हीं को जानकर मृत्यु को पार किया जा सकता है, इसके अतिरिक्त लक्ष्य तक पहुंचने का और कोई रास्ता नहीं है।)


इसी तरह भविष्य पुराण और श्री मद् भागवत पुराण में भी कुछ जगहों पर एसे उल्लेख मिलते हैं... 

अहमिदि पितुष्परि मेघामृतस्य जगभ अहं सूर्य इवा जानी ।। 
(भविष्य पुराण प्रतिसर्ग पर्व चतुर्थ अध्याय कलि कृतविष्णु स्तुति:) 
अज्ञान हेतु कृत मोहमदान्धकार नाशं विद्यायं हित दो दयते विवेक। 
(
श्री मद भागवत पुराण 2/72) 

इसके अतिरिक्त ऋग्वेद मं0 8 सूक्त 6-10, अथर्ववेद काण्ड 20 सूक्त 115, मंत्र 1, तथा सामवेद 152वें तथा 115वें मंत्र मे अहमदि शब्द का प्रयोग है भविष्य पुराण में तो अगामी अवतार संबंधी भविष्यवाणी काफी विस्तार से की गई है..... 

"
एतस्मिन्नन्तरे मलेच्छ आचार्येज रामन्वित:। 
महामद इति ख्यात: शिष्य शाखासमन्तिव:।। 
नृपश्चैव महादेवं मरुस्थलनि वासिनम। 
गंगा जलैश्च संस्नाप्थ पन्चगब्यसमन्वितै:।। 
चन्दनादिभिरम्तच्य॔ तुष्यव मनसा हरम। 
नमस्ते गिरिजानाथ मरुस्थलनिवासिने:।। 
ग्रिपूरासुरनाशाय बहुमाया प्रवतिने। 
मलेच्छ र्गुप्ताय शुद्धाम सच्चिदानंद रूपिणे।। 
त्वं मां हि किं करं विद्धि शरणार्थभुपा गतम।" 
(
भविष्य पुराण प्रतिसर्ग पूर्व वृतीमखण्ड को 3) 

(
उसी बीच अपने शिष्यों के साथ महामद नामी पवित्र मलेच्छ (गैर आर्य) वहां आयेगा। राजा भोज मरुस्थल निवासी महादेव के दरबार में तमाम गुनाहों के धोने से पवित्र हो कर, गंगा स्नान करके अपने आप को सुपुर्द करके यूं अनुरोध करेग -- ऐ रेगिस्तान के निवासी, शैतान को पराजित करने वाले, चमत्कारों के मालिक, बुराइयों से पाक साफ, सत्य वादी, सचेत, साक्षात, ईश प्रेम में डूबे हुए, तुम्हें प्रणाम या सलाम हो, तुम मुझे अपनी शरण में आया हुआ दास समझो।) 

उवाच भूपति प्रेम्णा मायाद विशारद:। 
तब देवो महाराज मम दास्तवभगत:।। 
ममाच्छिष्टं स भुन्जीयात् तथा तत्पश्य भो नृप। 
इति श्रुत्वा तथा दृष्टा परं विसमयमा यौ।। 
मलेच्छ धर्मे मतिश्चासीत्तस्य भूपस्य द्वारूणै।"

(
राजा भोज के पास रखी हुई पत्थर की मूर्ति के लिये महामद कहेंगे कि वह मेरा झूठा खा सकती है, जिसे तुम पूजते हो। यह कहकर राजा भोज को एसा ही चमत्कार दिखायेंगे। यह सुनकर और देखकर राजा भोज को बड़ा आश्चर्य होगा और मलेच्छ धर्म में उसकी आस्था हो जायेगी।) 

रात्रो स देवरूपस्य बहुमायाविशारद:। 
पैशाचं देहमास्थाय भोजराजं ही सोडब्रवीता।। 
आर्य धर्मों ही ते राजन सर्वधर्मोत्तम: स्मृत:। 
ईशाज्ञया करिष्यामि पैशाचं धर्म दारूणम।। 
लिंगच्छेदी शिखाहीन: श्मश्रुधारी स दूषक:। 
उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनों मम। 
मुसले नैव संस्कार: कुशैरिव भविष्ति।। 
तस्मान्मुसजवन्तो ही जातयो धर्म दूषक:। 
इति पैशाचधर्मश्च भविष्यति मया कृत:।। 
इत्युकत्वा प्रययौ देव: स राजा गेहमाययौ।।" 

(
रात्रि में कोई देवदूत पैशाचदेह धारण करके राजा भोज से बोला कि हे राजन! यद्यपि तुम्हारा आर्य धर्म सभी धर्मों से उत्तम है, फिर भी उसी धर्म को पैशाचधर्म नाम से ईश्वर की आज्ञा से स्थापित करूंगा, खतना किया हुआ, चोटी से हीन, दाढ़ी रखने वाला, ऊंची बात कहने वाला (इशारा अजान की तरफ), मेरा खास आदमी होगा। शुद्ध पशुओं का आहार करने वाला, कुशों से जैसे संस्कार होता है वैसा उसका मुसल से संस्कार होगा, इसी से मुसलमान जाति दूषित धर्मों पर दोष लगायेंगे, ऐसा मेरे द्वारा किया गया पैशाचधर्म होगा। यह कहकर देवता चला गया और राजा घर लौटा।)

भले उनके पास अपने शोध को सही साबित करने के लिए मज़बूत तर्क हों लेकिन फिर भी हमे ये नहीं भूलना चाहिए कि पूरा श्लोक कई और बातें भी कह देता है जो उस मतलब के साथ फिट नहीं बैठती जो निकाला गया, उदाहरण के लिए भविष्यपुराण में राजा भोज वाला किस्सा... ऐसे किसी किस्से का इस्लामी इतिहास में कोई अस्तित्व नहीं... फिर ये सब ग्रन्थ हज़ारों साल पहले लिखे गए जिनके मतलब में थोड़ी बहुत हेरफेर (उस वक़्त के हिसाब से) भी पूरा मतलब बदल सकती है...

दुसरे सृष्टि के निर्माण और व्यवस्था का जो कांसेप्ट वेदों में है वो इस्लामिक मान्यताओं के एकदम उलट है, ऋग्वेद की एक लाइन कि ईश्वर निराकार है और उसका कोई आकर नहीं, को छोड़ कर बाकी कोई और चीज़ इस्लामिक कॉन्सेप्ट से मेल नहीं खातीं... इन्हीं उल्लेखों का सहारा लेकर डा0 जाकिर नाईक जैसे विद्वान हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथों में पैगम्बर को स्थापित करने की कोशिश करते हैं,,, 

अब ये तो अजीब है कि किसी ऐसे ग्रन्थ से आप अपने मतलब की कुछ लाइन्स निकाल कर उन्हें मान्यता दे दें और बाकी ग्रन्थ को नकार दें... वेदों में 33 देवी देवताओं का ज़िक्र है, इस्लाम में देवी देवताओं वाला कॉन्सेप्ट कहाँ है? हाँ एक बात या यूँ कहें कि एक सवाल तो फिर भी रह जाता ही है कि इन ग्रंथों में इस तरह की भविष्यवाणियां क्यों की गयीं?
Written by Ashfaq Ahmad

1 comment:

  1. Bhavishya Purana me to mohammad ko rakshash bataayaa gaya hai

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